International Desk:
मिडिल ईस्ट में जारी जंग और बढ़ते तनाव के बीच ईरान की राजनीति में बड़ा भूचाल आता दिख रहा है। ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi ने एक भावनात्मक और तीखा बयान जारी करते हुए दावा किया है कि सर्वोच्च नेता Ali Khamenei का शासन अब “इतिहास की धूल में मिल चुका है” और यह समय ईरान में राष्ट्रीय उत्सव और निर्णायक जनविद्रोह की शुरुआत का है।
रेज़ा पहलवी ने कहा कि ईरान की जनता अब भय और दमन के साये से बाहर निकलकर सड़कों पर उतरे और लोकतांत्रिक, स्वतंत्र व समृद्ध ईरान के निर्माण की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाए। उन्होंने सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों से अपील की कि वे इस्लामिक गणराज्य का साथ छोड़कर राष्ट्र और जनता के साथ खड़े हों।
उन्होंने अपने संदेश में कहा,
“यह आपके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण है। ढहते हुए शासन को बचाने की कोई भी कोशिश विफल होगी। अब समय आ गया है कि आप देश के भविष्य को सुरक्षित करें और परिवर्तन का हिस्सा बनें।”
सत्ता परिवर्तन की चेतावनी
पहलवी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शासन-निष्ठ किसी नए नेता को आगे लाने की कोशिश की गई, तो उसे न तो जनता का समर्थन मिलेगा और न ही अंतरराष्ट्रीय मान्यता। ऐसे किसी भी प्रयास को “शासन के अपराधों में भागीदारी” माना जाएगा।
अमेरिका का समर्थन
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह ईरानी जनता के लिए अपने देश को वापस पाने का सबसे बड़ा अवसर है। उन्होंने संयुक्त अमेरिका–इज़रायल सैन्य कार्रवाई के बाद इसे “ईरान के इतिहास का निर्णायक मोड़” करार दिया।
बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
गौरतलब है कि अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। इसी बीच भारत सरकार भी विदेशों में फंसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और विदेश मंत्री S. Jaishankar हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
क्या बदलेगा ईरान का भविष्य?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान में बड़े पैमाने पर जनविद्रोह होता है, तो यह पूरे मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति को बदल सकता है। आने वाले दिन ईरान और पूरे क्षेत्र के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।













