हिमाचल प्रदेश मॉनसून सीज़न 2025 की चपेट में आकर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने बताया है कि बारिश‑और उससे जुड़े अन्य प्राकृतिक आपदाओं एवं सड़क हादसों की घटनाओं से अब तक कुल मौतों का आंकड़ा 427 के करीब पहुँच गया है: जिसमें 243 मौतें बारिश से संबंधित घटनाओं (भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, डूबने, बिजली गिरने आदि) से हुई हैं, और 184 मौतें सड़क हादसों की वजह से हुई हैं।
- बारिश‑जनित घटनाएँ
- भारी बरसात, बादल फटने (cloudbursts), नदी किनारों पर उफान, ज़मीन का अचानक फिसलना आदि ने जान‑माल का बड़ा नुकसान किया है। कई इलाकों में ढलानों की ज़मीन खिसकने से मकान, सड़कें और पुल टूट गए हैं। बिजली गिरने और कालाबीज जैसे हादसे भी आम हुए हैं।
- सड़क हादसे
- बारिश के बाद सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं, विज़िबिलिटी कम हो गई है, और कई स्थानों पर भूस्खलन या मलबा सड़क पर आ गया है। ये सभी कारक मिलकर सड़कों पर चलने वालों के लिए जानलेवा स्थिति बना रहे हैं।
- बुनियादी ढाँचे को भारी नुक़सान
- SDMA के अनुसार सड़कों, पुलों, पानी की आपूर्ति एवं बिजली योजनाओं को भारी खराबी पहुंची है। कई स्थानों पर संपर्क टुटा है, गांव‑इलाकों में पानी और बिजली बंद हो गई है।
- आर्थिक व सामाजिक प्रभाव
- सिर्फ़ मौतें ही नहीं, खेती‑बाड़ी, पशुपालन, पंखे के लिए पक्षी पालन (poultry), मकान‑घर, दुकानें, सार्वजनिक सुविधाएँ जैसे पानी, बिजली, सड़कें आदि को भारी नुकसान हुआ है। इससे प्रभावित परिवारों की आजीविका पर बड़ा संकट आया है।








