जालंधर, 20 सितंबर 2025 — पिछले कई सालों से 1,158 असिस्टेंट प्रोफेसर्स अपनी नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शन और संवाद कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से संविदा पर काम कर रहे हैं, लेकिन स्थायी नियुक्ति और वेतनमान में समानता नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
आज जालंधर में कोंग्रेसी नेता परगट सिंह ने 1,158 असिस्टेंट प्रोफेसर्स के मुद्दे पर मजबूती से आवाज उठाई है। उन्होंने कहा है कि इन शिक्षकों को उनके हक और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
परगट सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि ये “1,158 असिस्टेंट प्रोफेसर्स जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में निष्ठा और समर्पण से काम किया है, वे लंबे समय से अनिश्चितता और असुरक्षा की स्थिति में हैं। यह हमारे लिए शर्म की बात है कि उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। मैं सरकार और संबंधित विभागों से आग्रह करता हूं कि जल्द से जल्द इस मुद्दे को सुलझाया जाए ताकि ये शिक्षक अपनी नौकरी को लेकर आश्वस्त महसूस कर सकें।
“असिस्टेंट प्रोफेसर्स लंबे समय से अपनी सेवाओं के उचित मूल्यांकन, नियमितीकरण और स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इन शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा की जाए और जल्द से जल्द उनके मामले का निपटारा किया जाए।
दूसरी तरफ असिस्टेंट प्रोफेसर्स के प्रतिनिधियों ने भी परगट सिंह के बयान का स्वागत किया और कहा कि यह उनका एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि वे संघर्ष जारी रखेंगे जब तक न्याय नहीं मिलता। शिक्षक संघ ने आगे कहा कि सरकार को इस मामले को प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि शिक्षकों का मनोबल सीधे तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डालता है।













