International Desk | Munich Security Conference 2026:
रूस से तेल खरीद को लेकर India–US diplomatic relations में एक बार फिर मतभेद सामने आए हैं। Munich Security Conference के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने दावा किया कि भारत ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि वह रूस से additional Russian oil imports नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पहले से किए गए सौदे और मौजूदा ऑर्डर जारी रह सकते हैं।
रुबियो ने US sanctions on Russia का हवाला देते हुए कहा कि भारत की ओर से यह संकेत मिला है कि भविष्य में नए तेल सौदे नहीं किए जाएंगे, लेकिन इस संबंध में अंतिम फैसला अभी लंबित है। उनके इस बयान के बाद global energy market और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई।
इस पर भारत के विदेश मंत्री S Jaishankar ने उसी सम्मेलन के अगले सत्र में सख्त और संतुलित प्रतिक्रिया दी। जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul के साथ बातचीत के दौरान जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि भारत strategic autonomy policy पर पूरी तरह कायम है और देश किसी भी प्रकार के external pressure में अपने निर्णय नहीं करता।
जयशंकर ने कहा कि भारत की energy security policy उपलब्धता, कीमत और जोखिम जैसे व्यावहारिक कारकों पर आधारित होती है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “Global energy supply chain बेहद जटिल है। भारत की तेल कंपनियां वही फैसले लेंगी, जो देश के सर्वोत्तम राष्ट्रीय और व्यावसायिक हित में होंगे।”
विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भारत के पास स्वतंत्र निर्णय लेने का पूरा अधिकार है, भले ही वह Western geopolitical thinking से मेल खाए या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और वैश्विक मंच पर उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है।








