नई दिल्ली | Supreme Court News:
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को hate speech in India से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान नेताओं और संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को कड़ी नसीहत दी। अदालत ने कहा कि राजनीतिक दलों और नेताओं को भाषण देने से पहले अपनी सोच सुधारने की जरूरत है, ताकि देश में भाईचारा (social harmony) और आपसी सम्मान बना रहे।
भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने स्पष्ट कहा कि नफरत भरे भाषण (hate speech) लोकतंत्र और संविधान की आत्मा के खिलाफ हैं।
🏛️ “भाषण से पहले विचार आते हैं” – CJI की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश ने कहा,
“नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाना चाहिए। नफरत भरे भाषण रोकने के लिए सबसे पहले सोच को सुधारने की आवश्यकता है, क्योंकि भाषण से पहले विचार आते हैं।”
CJI ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे constitutional morality, mutual respect, और human dignity के सिद्धांतों का पालन करें। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन आपसी सम्मान बनाए रखना उतना ही जरूरी है।
⚖️ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट नौ याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के कथित आपत्तिजनक भाषणों और एक वायरल वीडियो के संदर्भ में दायर की गई थी।
याचिका में मांग की गई थी कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए hate speech रोकने हेतु सख्त दिशा-निर्देश (guidelines) जारी किए जाएं।
हालांकि, CJI ने कहा कि यह याचिका एक विशेष व्यक्ति को टारगेट करती प्रतीत होती है, इसलिए इसे वापस लेकर सभी राजनीतिक दलों को शामिल करते हुए नई याचिका दाखिल की जाए।
👩⚖️ जस्टिस नागरत्ना: “दिशानिर्देश बनेंगे, लेकिन पालन कौन करेगा?”
जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “मान लीजिए हम दिशानिर्देश जारी कर दें, लेकिन उनका पालन कौन करेगा? देश में भाईचारा खुद राजनीतिक दलों को ही बढ़ाना होगा।” वहीं जस्टिस बागची ने कहा कि पहले से ही कई Supreme Court guidelines on hate speech मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
🔥 विवाद की जड़: असम बीजेपी का वीडियो और बयान
दरअसल, 8 जनवरी को कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि Assam BJP X handle से एक वीडियो पोस्ट किया गया, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हुए दिखाया गया था।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी यह वीडियो X पर शेयर करते हुए इसे targeted violence और hate promotion करार दिया था।
इसके अलावा, सीएम सरमा के कई पुराने बयान भी चर्चा में रहे हैं, जिनमें उन्होंने कथित रूप से “मिया समुदाय” को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
🚨 सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि नफरत फैलाने वाली राजनीति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और सभी राजनीतिक दलों को संविधान के मूल्यों के अनुसार व्यवहार करना चाहिए।











