चंडीगढ़ / पंजाब डेस्क:
पूर्व पंजाब मुख्य सचिव और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी Vijay Kumar Janjua के खिलाफ चल रहे graft case में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए prosecution sanction को मंजूरी दे दी है। अब उनके खिलाफ Prevention of Corruption Act के तहत कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
केंद्र सरकार के Department of Personnel and Training (DoPT) ने 11 फरवरी 2026 को इस मामले में आधिकारिक आदेश जारी किया। इस संबंध में जानकारी Punjab and Haryana High Court में जस्टिस अलका सरिन की बेंच के समक्ष पेश की गई। यह मामला contempt petition hearing के दौरान सामने आया।
1989 बैच के IAS अधिकारी रहे विजय कुमार जंजुआ विवाद के समय Director-cum-Secretary, Industry and Commerce Department के पद पर तैनात थे। उनके खिलाफ यह मामला Vigilance Bureau Mohali द्वारा 9 नवंबर 2009 को दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता Tulsi Ram Mishra ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने प्लॉट से सटी खाली जमीन के आवंटन के लिए आवेदन किया था, लेकिन अनुरोध खारिज कर दिया गया। बाद में जब वह जंजुआ के आवास पहुंचे, तो उनसे कथित रूप से ₹6 लाख रिश्वत (bribe demand) मांगी गई। इसके बाद विजिलेंस टीम ने trap operation कर ₹2 लाख की कथित बरामदगी की थी।
हालांकि 2015 में मोहाली की विशेष अदालत ने जंजुआ को राहत दी थी, लेकिन इस फैसले को चुनौती देते हुए शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई करते हुए 2023 में जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा था कि human greed has no limits, और सरकारी वेतन बढ़ने के बावजूद corruption in bureaucracy खत्म नहीं हुआ है।
उन्होंने यह भी टिप्पणी की थी कि गंभीर आरोपों के बावजूद जंजुआ Financial Commissioner Revenue और Chief Secretary जैसे उच्च पदों तक पहुंचे, जो सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
अब केंद्र की मंजूरी के बाद Punjab corruption case, IAS officer bribery case, और Vijay Kumar Janjua prosecution जैसे मामलों में बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। जल्द ही ट्रायल प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।













