The Jalandhar Times | हिंदी समाचार | 11 अक्टूबर 2026
चंडीगढ़, 11 अक्टूबर (The Jalandhar Times): पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने रविवार को चंडीगढ़ में अपनी राजनीतिक एकजुटता दिखाने की कोशिश की। जालंधर कैंट से विधायक एवं भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष के रूप में औपचारिक रूप से पदभार संभाला। सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में आयोजित समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग एक ही मंच पर नजर आए। लंबे समय से पार्टी के भीतर चल रही खींचतान के बीच दोनों नेताओं की मौजूदगी को संगठनात्मक एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
समारोह में पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और कई अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी पहुंचे। सचिन पायलट ने पार्टी का झंडा फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की। पंजाब के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक चंडीगढ़ पहुंचे। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान बारिश होने से खुले स्थान पर मौजूद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन खराब मौसम के बावजूद कार्यकर्ताओं की मौजूदगी बनी रही।
परगट सिंह की नियुक्ति के बाद यह पहला बड़ा अवसर था, जब पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नेता सार्वजनिक रूप से एक मंच पर दिखाई दिए। पिछले कुछ समय से प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर मतभेद और वरिष्ठ नेताओं के बीच बयानबाजी चर्चा में रही है। ऐसे में चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग का एक साथ कार्यक्रम में शामिल होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, मंच पर दिखाई गई एकजुटता पार्टी के भीतर सभी मतभेद समाप्त होने का प्रमाण नहीं है।
कांग्रेस हाईकमान ने 2 अक्टूबर को परगट सिंह को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। परगट सिंह इससे पहले पंजाब सरकार में मंत्री रह चुके हैं और जालंधर कैंट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। खेल के मैदान से राजनीति में आए परगट सिंह के सामने अब अलग-अलग नेताओं और संगठनात्मक इकाइयों के बीच तालमेल स्थापित करने की चुनौती है।
पदभार ग्रहण करने से पहले परगट सिंह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर संगठन को मजबूत करने की अपील की थी। उनका जोर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और आम लोगों से सीधा संपर्क बढ़ाने पर है। उन्होंने पंजाब की कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, नशे की समस्या, खेती और राज्य के आर्थिक हालात जैसे मुद्दों को लेकर भी अपनी प्राथमिकताएं सामने रखी हैं।
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के लिए यह नेतृत्व परिवर्तन अहम है। राज्य में वर्तमान समय में आम आदमी पार्टी की सरकार है, जबकि कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभा रही है। ऐसे में पार्टी के सामने सरकार से जुड़े मुद्दों को उठाने के साथ-साथ अपने संगठन को मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।
राजनीतिक दृष्टि से परगट सिंह की ताजपोशी केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव है। चन्नी, वड़िंग, बाजवा और अन्य नेताओं की साझा मौजूदगी से पार्टी ने एकजुटता का संकेत जरूर दिया है, लेकिन यह तालमेल आने वाले महीनों में जिला स्तर से लेकर विधानसभा क्षेत्रों तक कितना प्रभावी रहता है, इस पर भी नजर रहेगी।
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